ब्रेकिंग
प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखा ममता बनर्जी को कड़ा पत्र प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल ईश्वर की अनुपम कृति हैं महिलाएं : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 4.24 करोड़ के विज्ञापन पर घमासान, भूपेश सरकार के फैसले की जांच के संकेत कैबिनेट के बड़े निर्णय: नए विधेयकों और योजनाओं को स्वीकृति ईश्वर की अनमोल कृति हैं महिलाएं : अरुण साव पुरानी रंजिश में युवक पर धारदार हथियार से हमला, सुपेला पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार महापौर की अनोखी पहल,सड़क सुरक्षा का संदेश: महापौर द्वारा तीन अलग-अलग शादियों में पहुँचकर दूल्हा-दुल्...
बिलासपुर

अनुकंपा नियुक्ति पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: परिवार में एक सदस्य सरकारी सेवा में होने पर नहीं मिलेगा लाभ

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि मृतक कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो अनुकंपा नियुक्ति के लिए किसी अन्य आश्रित के दावे पर विचार नहीं किया जाएगा। यह फैसला जस्टिस बी. डी. गुरु की एकलपीठ ने सुनाया और इसी आधार पर याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी।

यह मामला मुरारीलाल रक्सेल द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी मां की मृत्यु के बाद नगर निगम बिलासपुर में अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि उनकी मां नगर निगम की नियमित कर्मचारी थीं, जिनका 21 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया। उन्होंने 22 फरवरी 2021 को नियुक्ति हेतु आवेदन किया था, जिसे 13 सितंबर 2023 को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि याचिकाकर्ता के पिता पहले से ही नगर निगम में कार्यरत हैं।

नगर निगम की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के 29 अगस्त 2016 के परिपत्र के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है, तो अनुकंपा नियुक्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंने रिट अपील संख्या 236/2022 में उमेश ठाकुर मामले में हाई कोर्ट के पूर्व निर्णय का हवाला भी दिया।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह अपने पिता से लंबे समय से अलग रह रहा है और अपनी मां पर आश्रित था। लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नीति के अनुसार पारिवारिक स्थिति में सरकारी सेवा में एक सदस्य होने पर किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि अनुकंपा नियुक्ति वास्तविक आर्थिक संकट की स्थिति में ही दी जाएगी, न कि जब परिवार पहले से सरकारी नौकरी से सुरक्षित है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button